चिकनगुनिया की रोकथाम के लिए यहाँ हैं सबसे बेहतर उपाय, जोड़ो के दर्द और कमज़ोरी को कर देगा छू

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चिकनगुनिया की रोकथाम (बचाव)

चिकनगुनिया से बचाव के लिये निम्नलिखित उपाय किये जा सकते हैं।

  • मच्छरों का पनपना रोकने के लिए घर, विद्यालय, और कार्यस्थल पर रुके हुए पानी को हटाएँ।
  • डीईईटी, इकेरिडिन, पीएमडी, या आईआर3535 के उपयोग से बने कीट रोधकों का प्रयोग करें।
  • त्वचा के खुले हिस्से पर मच्छर रोधी क्रीम लगाएँ।
  • जो कमरे वातानुकूलित नहीं हैं वहां मच्छरों को रोकने के लिए जालियाँ लगाएँ।
  • मच्छरों से बचाव के लिए हल्के रंगों वाले और अधिक लम्बाई वाले कपड़े पहनें।

चिकनगुनिया बुखार एक तरह का वायरल बुखार हैं जो संक्रमित मच्छरों के काटने से होता हैं. चिकनगुनिया आज पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बना हुआ हैं. हर साल ये बुखार लाखों लोगो को अपनी चपेट में लेता हैं, ये वायरस लोगो में दो संक्रमित मच्छर एडीज अल्बोपिक्टस और एडीज एजिप्टी के कारण फैलता हैं. इस बुखार को आयुर्वेद में संद्दिज्वर भी कहते हैं जिसमे जोड़ो का दर्द कई महीनो तक कभी-कभी पूरे साल तक बना रहता हैं.

चिकनगुनिया बुखार से 1,000 में से किसी 1 की मारने आशंका होती किन्तु इसमें होने वाला जोड़ो का दर्द कई दिनों तक चलता है जिससे मरीज़ को चलने में अत्यधिक परेशानी होती है.

चिकनगुनिया से बचने के तरीके

मच्छरों की जनसँख्या को नियंत्रित करे
चिकनगुनिया मच्छरों के काटने से होता हैं इस कारण मच्छरों की जनसँख्या को नियंत्रित करना अत्यधिक आवश्यक हो जाता है. ज़्यादातर ये बुखार एडीज एजिप्टी मच्छर से होता हैं यही संक्रमित मच्छर डेंगू और पीतज्वर जैसी अन्य बीमारियों को भी संचरित कर सकता है.

चिकनगुनिया बुखार का वायरस अल्फावायरस नामक वर्ग का होता है.
यह मच्छर मनुष्यो में उत्सर्जित होने वाले तत्व जैसे एमिनो एसिड, लैक्टिक एसिड आदि से मानव रक्त की और आकर्षित हो के लोगो को संक्रमित करता हैं

खुद को मच्छरों से बचाये
एडीज एजिप्टी मच्छर दिन के समय और शाम को अत्यधिक सक्रिय होते हैं. यह मच्छर ज़्यादातर छाव या ठंडी वाली जगह पाए जाते हैं . तो अपने घर के आस पास या अपने घर में पानी न जमा होने दे. घर पर अगर फूलदान हैं तो उसका पानी नियमित तौर पर बदलते रहे.एडीज एजिप्टी मच्छर का जीवनकाल एक महीने का होता है | परन्तु, इसके अंडे ठण्ड और गर्मी के प्रति प्रतिरोधी होते हैं. ये मच्छर पानी में ही अपनी जनसँख्या बढ़ाते हैं. इसलये अपने आस पास पानी न जमा होने दे.

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साफ़ सफाई का ख़ास धयान रखे
अपने घर पर वा आस पास खास साफ़ सफाई का धयान रखे. घर पर ड्रेनेज सिस्टम को साफ़ सुथरा रखे. ये मच्छर ठहरे हुए पानी में अधिक विकसित होते हैं इसलये अपने आस पास पानी न जमा हने दे.

जब ऐसी स्थिति आती है कि खाड़ी या नदी पौधों और कचरे से लबालब भर जाती है तब पानी का प्रवाह भी रुक जाता है इसलिए अपनी कम्युनिटी के साथ मिलकर एक ऐसा सफाई अभियान चलायें जिससे पानी का प्रवाह फिर से शुरू हो जाये

अपने तालाब वा पानी वाली जगह में कुछ मछलियों को जगह दे

मच्छरों को नियंत्रित करने के लिए मछलिया एक आंच विकल्प होती हैं इस कारण अपने तालाब या पानी वाली जगह में कुछ मछलिया डाल दे. मच्छरों को खाने वाली मछलियों में सबसे आम मछली है- गम्बुसिया अफ्फिनिस. जिसे मच्छर खाने वाली मछली के नाम से ही जाना जाता है. अन्य मछलियों में मिन्नो, कॉर्प टिलापिया और किलफिश

घर पर मॉसक्विटो रेपलेंट का उपयोग करे
अपने घर पर मॉसक्विटो रेपलेंट का उपयोग ज़रूर करे. जहा सोये वहां मच्छरदानी का उपयोग ज़रूर करे. खिड़की डरवाने सील पैक रखे ताकि मच्छर अंदर न सके.

ओडोमास का प्रयोग करे. मच्छर मारक लोशन का इस्तेमाल करे. सुरक्षात्मक कपडे पहने

घर से बहार निकलते समय फुल स्लीव्स की शर्ट वा लंबी पैन्ट्स पहने. ताकि मच्छर काट ना सके
मच्छर बॉडी हीट के प्रति भी आकर्षित होते हैं इसलिए हलके रंग के कपडे पहनना उचित होता है जो बहुत अधिक हीट को अवशोषित नहीं करते और शरीर को ठंडा बनाये रखते हैं |

  • मच्छर मारे
  • मच्छरों के होने पर उन्हें मारने की कोशिश करे
  • उन्हें अपने ऊपर बैठने न दे
  • बैठने से पहले हे उन्हें मार दे नहीं तो फर उड़ा दे

चिकनगुनिया के लक्षण

जोड़ो में दर्द
अगर जोड़ो में दर्द होतो तुरन्त उसपे धयान दे, जोड़ो में दर्द लालिमा होना चिकनगुनिया के लक्षण होते हैं
कभी-कभी, पीड़ित व्यक्ति अपने गंभीर जोड़ो के दर्द के कारण हिलने-डुलने में भी असमर्थ हो सकते हैं जिसके कारण उन्हें बैठी हुई स्थिति से उठकर खड़े होने, चलने और दौड़ने में परेशानी होती है और यही नहीं बल्कि लिखने, वाहन चलाने और चीज़ों को पकड़ने आदि में भी परेशानी होने लगती है.

  • उल्टियां होना
  • कंजंक्टिवाइटिस और प्रकाश असंवेदनशीलता शामिल हैं
  • लौ ग्रेड बुखार या ज़ुकाम होने
  • ठण्ड लगना बहुत तेज़ बुखार आना

चिकनगुनिया का डायग्नोसिस

अगर रोगी को चिकनगुनिया होने का संदेह हो तो ELISA टेस्ट नामक एक विशिष्ट टेस्ट के लिए उनका ब्लड सैंपल लिया जायेगा. इस टेस्ट से चिकनगुनिया का पता लगाया जा सकता हैं
ब्लड सीरम का टेस्ट कराये
अगर ये टेस्ट पॉजिटिव आये तो तुरंत सतर्क हो जाए और डॉक्टर से परामर्श ले

चिकनगुनिया के लक्षणों को शांत करे, क्योंकि इस बुखार का कोई विशेष इलाज नहीं हैं इसलये इसके लक्षण जैसे हे दिखे वैसे हे घरेलू उपचार शुरू कर दे.कुछ घरेलू उपचार इस प्रकार हैं

जोड़ो में दर्द हो तो उसमे गरम पानी से सिकाई करे गरम पानी से सिकाई करने से रक्त का प्रवाह खुलेगा और मांसपेशियों को आराम मिलेगा. मांसपेशियों के दर्द के लिए कोई दर्द निवारक जेल का उपयोग करे.

दिन में कई बार या आवश्यकतानुसार मालिश करना एक सुरक्षित विकल्प है. सूजन और दर्दसे रहत पाने के लिए कोल्ड पैक लगाए

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